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Mulayam Singh Yadav

Kahani UP Ki: अजित सिंह CM की तैयारी करते रह गए और मुलायम बन गए थे मुख्यमंत्री… फिर फतेहपुर से हटा दी थी हैंडलूम योजना

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया है तो वहीं एक समय में मुलायम के समर्थन वापस ले लेने से वीपी सिंह की सरकार गिर गई थी और इसका खामियाजा फतेहपुर के लोगों को उठाना पड़ा था।

Kahani UP Ki: Ajit Singh kept on preparing for the CM and Mulayam had become the Chief Minister… then the handloom scheme was removed from Fatehpur

मुलायम कैसे बने थे सीएम और वीपी कैसे बने थे पीएम


देश में सत्ता के ऐसे ही चरखा दांव की कहानी उत्तर प्रदेश के बूढ़े दिलों में अब भी जवां हैं। 1989 के विधानसभा चुनाव में जनता दल की जीत के बाद सीएम घोषित हो चुके अजित सिंह चौधरी सपने संजोते रह गए और मुलायम सिंह यादव अपने दांव से सीएम बन गए थे। पांच दिसंबर 1989 मुलायम ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब केंद्र में भी जनता दल की सरकार बनी। विश्वनाथ प्रताप सिंह तो देश के प्रधानमंत्री बन चुके थे। यूपी में पार्टी की जीत के साथ ही उन्होंने घोषणा कर दी थी कि अजित सिंह सीएम होंगे और मुलायम सिंह यादव डेप्युटी सीएम होंगे। लखनऊ में अजित सिंह की ताजपोशी की तैयारियां चल रही थीं कि मुलायम सिंह यादव ने डेप्युटी सीएम का पद ठुकरा कर सीएम पद की दावेदारी कर दी। तब प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने फैसला किया कि सीएम पद का फैसला लोकतांत्रिक तरीके से गुप्त मतदान के जरिये होगा। फिर जो हुआ, वह सूबे की रोचक राजनीति का एक बड़ा किस्सा बन गया।

फतेहपुर में ढाई अरब से अधिक की कई योजनाओं को लगा था ग्रहण


नब्बे के दशक में फतेहपुर से सांसद बनकर दिल्ली पहुंचे वीपी सिंह के प्रधानमंत्री बनते ही जनपद वासियों के लिए एक नई रोशनी दिखाई दी। हुआ भी ऐसा ही। वीपी सिंह के प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिनों बाद जिले के लिए कई योजनाओं को मंजूरी भी मिली। राजनीतिक उथल-पुथल के चलते काफी अस्थिरता का माहौल था। क्षेत्रीय पार्टियों से मिलकर बनी जनता दल में दरार आने लगी। मुलायम ने समर्थन वापस ले लिया और केन्द्र की वीपी सिंह की सरकार गिर गई। सरकार गिरते ही उसका असर सीधे फतेहपुर में पड़ा। प्रधानमंत्री द्वारा दी गईं जिले की सौगात थम गई।

शुरू होने के साथ ही विलुप्त हो गया हैंडलूम प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री बनने के बाद ही वीपी सिंह ने देश में आठ नए हैंडलूम सेंटर बनाए। इनमें से फतेहपुर को भी एक हैंडलूम सेंटर की सौगात मिली। फतेहपुर के इसी हैंडलूम सेंटर को मैंनचेस्टर बनाने की योजना चल रही थी और सरकार गिर गई। सरकार गिरते ही तत्कालीन सीएम ने हैंडलूम सेंटर को बनारस के लिए प्रस्तावित कर दिया। फतेहपुर में यह हैंडलूम सेंटर उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम की बिल्डिंग में लगाया गया था। यह बिल्डिंग आज भी आबू नगर में स्थित है।
इस हैंडलूम सेंटर का मकसद युवाओं को रोजगार उपलब्द्ध कराना था। इन केन्द्रों से हथकरघा उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ बुनकरों, निर्यातकों, निर्माताओं और डिजाइनरों को भी प्रोत्साहन मिलता। इन केन्द्रों पर बाजार के मुताबिक, नए डिजाइन तैयार करने में मदद मिलती। इसी के साथ ही पीएम बनने के बाद फतेहपुर में वीपी सिंह ने करीब ढाई अरब रुपये की सीवर लाइन योजना को प्रस्तावित किया था।

बुजुर्गों ने बताई नब्बे के दशक की कहानी


नब्बे के दशक में राजनीति में सक्रिय रहे जनपद के वह लोग जिनकी उम्र करीब नब्बे की हो चुकी है। बातचीत के दौरान बताया कि अगर वीपी सिंह द्वारा प्रस्तावित की गई योजनाओं को पंख लग गए होते तो शायद हमारे जनपद की तस्वीर कुछ और होती। मुलायम सिंह ने तो हमारे जनपद की योजनाओं को दबाकर नर्क बना दिया। अब जातिवाद की राजनीति होने लगी है, तब जातिवाद नहीं था, समाजवाद था, जो अब की राजनीति में देखने को भी नहीं मिलता।

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