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Biography

Vinay shankar Tiwari Biography Wikipedia – विनय शंकर तिवारी जीवन परिचय विकीपीडिया

Vinay shankar Tiwari Biography Wikipedia – विनय शंकर तिवारी जीवन परिचय विकीपीडिया

विनय शंकर तिवारी एक भारतीय राजनीतिज्ञ और उत्तर प्रदेश की 17 वीं विधान सभा के सदस्य हैं जो चिलुपार का प्रतिनिधित्व करते हैं । वे बहुजन समाज पार्टी के सदस्य थे । दिसंबर 2021 में, वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए ।

व्यक्तिगत जीवन

तिवारी का जन्म 15 फरवरी 1966 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के टाडा गाँव में राजनेता हरि शंकर तिवारी के यहाँ हुआ था । उन्होंने 1987 में लखनऊ विश्वविद्यालय , लखनऊ से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने 21 फरवरी 1992 को रीता तिवारी से शादी की। उनके दो बच्चे हैं, एक बेटा और एक बेटी।

राजनीतिक कैरियर

तिवारी एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता हरि शंकर तिवारी छह बार चिलुपार से विधायक थे और उनके भाई भीष्म शंकर तिवारी संत कबीर नगर (2009-2014) से सांसद थे । उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2008 के उपचुनाव चुनाव में की थी, उन्हें बलिया (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से बहुजन समाज पार्टी ने टिकट दिया था । लेकिन सपा के नीरज शेखर से 1,31,286 मतों के अंतर से हार गए।

2009 के आम चुनावों में, उन्हें गोरखपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से बहुजन समाज पार्टी द्वारा टिकट मिला । उन्होंने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा लेकिन 2,20,271 मतों के अंतर से हार गए।

2017 से, उन्होंने चिलुपार (विधानसभा क्षेत्र) का प्रतिनिधित्व किया । उत्तर प्रदेश की 17 वीं विधानसभा (2017) के चुनाव में, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेश त्रिपाठी को 3,359 मतों के अंतर से हराकर चिलुपार और निर्वाचित विधायक से चुनाव लड़ा।

गोरखपुर की 7 सीटों पर सपा ने उतारे प्रत्याशी: चिल्लूपार से विनय शंकर तिवारी तो ग्रामीण से विजय बहादुर यादव पर जताया भरोसा

समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए 56 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। इनमें गोरखपुर सदर और चौरीचौरा सीट को छोड़ कर अन्य 7 सीटों पर भी प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। पार्टी ने ग्रामीण सीट पर पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव और चिल्लूपार सीट पर पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे और बसपा से सपा में शामिल हुए विनय शंकर तिवारी पर भरोसा जताया है।

इसके अलावा कैंपियरगंज सीट से अभिनेत्री काजल निषाद, पिपराइच से अमरेंद्र निषाद, सहजनवां से पूर्व यशपाल रावत, बांसगांव से डॉ. संजय कुमार और खजनी सीट से रूपावती को ​सपा ने प्रत्याशी चुना है। सपा की लिस्ट जारी होते ही गोरखपुर में एक बार फिर सियासी भूचाल आ गया।

सदर सीट पर चंद्रशेखर को समर्थन दे सकती है सपा
गोरखपुर सदर सीट को लेकर अभी सपा उम्मीदवार का सस्पेंस जारी है। पहले खबर थी कि भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे योगी आदित्यनाथ के करीबी उपेंद्र दत्त शुक्ल की पत्नी सुभावती शुक्ल को सपा ने उम्मीदवार घोषित कर दिया है। मगर, राजनीतिक पंडितों का मानना है कि सपा गोरखपुर सदर सीट से प्रत्याशी न उतारकर भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर को अपना समर्थन दे सकती है। दरअसल, सभी विपक्षी दलों के सामने सीएम योगी से गोरखपुर सदर सीट पर टक्कर लेना बड़ी चुनौती बन गई है। माना जा रहा है कि सपा के अलावा कई अन्य राजनीतिक दल चंद्रशेखर आजाद को अपना समर्थन दे सकते हैं।

……ानें…कौन हैं सपा के प्रत्याशी?

विजय बहादुर यादव, गोरखपुर ग्रामीण
विजय बहादुर यादव गोरखपुर ग्रामीण से पूर्व विधायक रहे हैं। पहली बार 2007 में वह मानीराम सीट से भाजपा के विधायक चुने गए। दूसरी बार 2012 से 2017 तक भी भाजपा के विधायक रहे। हालांकि इस बीच वह भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हो गए। सपा ने 2017 में उन्हें इसी सीट से उम्मीदवार घोषित किया। मगर, भाजपा प्रत्याशी विपिन सिंह के आगे टिक नहीं सके और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार भी सपा ने विजय बहादुर यादव पर ही भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है।

विनय शंकर तिवारी, चिल्लूपार
चिल्लूपार विधानसभा सीट से सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे और चिल्लूपार के निवर्तमान विधायक विनय शंकर तिवारी को आपना उम्मीदवार घोषित किया। विनय शंकर ने अपने राजनीतिक कैरियर कि शुरुआत 2007 से शुरू की, लेकिन सफलता नहीं मिली। वह गोरखपुर लोकसभा सीट से सीएम योगी के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं। बसपा के टिकट पर 2017 में वह पहली बार चिल्लूपार सीट से भाजपा कंडीडेट राजेश त्रिपाठी को हराकर विधायक बने। हालांकि इससे पहले इस सीट से उनके पिता पंडित हरिशंकर तिवारी ही लंबे समय तक विधायक रहे। लेकिन इस बार चुनाव से ठीक पहले उन्होंने बसपा का दामन छोड़ कर सपा का हाथ थाम लिया। ऐसे में इस बार उन्हें इस बार सपा ने उम्मीदवार घोषित किया है।

रुपावती बेलदार, खजनी
खजनी विधानसभा के 325 में सपा से रूपवती बेलादर को टिकट मिला। रूपवती बेलदार इससे पहले भी चुनाव में भाग्य आजमा चुकी हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। पहली बार निर्दल प्रत्याशी के रूप में वह चुनाव लड़ीं। इसके बाद 2012 में सपा से और फिर 2017 में भी सपा से वह तीसरे स्थान पर रहीं। रूपवती के पति पंजाब नेशनल बैंक में मैनेजर रहे हैं। मगर, कुछ साल पहले उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पत्नी के साथ ही राजनीति ​में उतर पड़े। हालांकि लगातार तीन विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद भी अब तक रूपवती को राजनीति में कोई मुकाम हासिल नहीं हुई है।

अमरेंद्र निषाद, पिपराइच
सपा ने पिपराइच से अमरेंद्र निषाद को अपना प्रत्याशी बनाया है। अमरेंद्र निषाद पूर्व मंत्री स्वर्गीय जमुना निषाद के बेटे हैं। इनके पिता बसपा शासनकाल में 2007 में विधायक हुए और बसपा सरकार में मंत्री भी हुए। इसके बाद उनकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। फिर उनकी जगह उनकी पत्नी राजमती निषाद 2011 से 2017 तक पिपराइच सीट से बसपा से विधायक रहीं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा ने अमरेंद्र को इस सीट से प्रत्याशी बनाया, लेकिन भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेंद्र पॉल ने उन्हें हरा दिया। 2017 के चुनाव में अमरेंद्र ​तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट से दूसरे स्थान पर बसपा प्रत्याशी आफताब आलम रहे। इस बार सपा ने इसी सीट से फिर अमरेंद्र निषाद को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

डॉ. संजय कुमार, बांसगांव
बांसगांव सीट से सपा ने डॉ. संजय कुमार को प्रत्याशी घोषित किया है। वह मूल रूप से चिल्लूपार के तीहा मुहम्मदपुर के निवासी हैं। 2013 में वह लोकसभा बांसगांव से कांग्रेस के प्रत्याशी भी रह चुके हैं, लेकिन हार गए थे। डॉ. संजय का परिवार सपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस से जुड़ा था। संजय कुमार ने अमेरिका पढ़ाई से की है। इसके बाद वह स्वदेश लौटकर राजनीति में भाग्य आजमा रहे हैं। उन्हें अब तक सफलता तो हाथ नहीं लगी, लेकिन इस बार सपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

काजल निषाद, कैंपियरगंज
फिल्म अभिनेत्री काजल निषाद को सपा ने कैंपियरगंज सीट से प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले 2012 में वह गोरखपुर ग्रामीण सीट से भी कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी हैं। मगर, बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि इस बार चुनाव का बिगुल बजने के बाद अचानक काजल ने कांग्रेस छोड़ सपा का दामन थाम लिया। हालांकि इस सीट पर भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह के सामने 2017 के चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं चिंता यादव भी टिक नहीं सकी थीं। उन्हें लगातार दो बार सपा के टिकट पर हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस बार भाजपा विधायक के आगे काजल निषाद कितनी मजबूती से टक्कर देंगी, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा।

यशपाल रावत, सहजनवां सहजनवां सीट से पूर्व विधायक यशपाल सिंह रावत को सपा ने इस बार फिर उम्मीदवार घोषित किया है। वह पुराने सपाई और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बेहद नजदीकी माने जाते हैं। यशपाल सिंह रावत की अपने क्षेत्र में अच्छी पैठ मानी जाती है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी शीतल पांडेय के सामने हार का सामना करना पड़ा था। यशपाल सिंह रावत 2007 में विधायक भी रह चुके हैं। उनके पिता शारदा प्रसाद रावत भी 1977 और 1989 दो बार विधायक और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वहीं, उनकी मां प्रभा रावत भी 1993 सपा से विधायक रह चुकी हैं।

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